
हर तस्वीर में जो नहीं है
घर के पुराने एल्बम में एक बात अक्सर बहुत देर से समझ आती है।
हर तस्वीर में लगभग सब हैं। बच्चे, मेहमान, वो चाचा जो कभी सीधे खड़े नहीं हुए। पर एक इंसान किसी तस्वीर में नहीं है।
वही, जो हर बार कैमरा पकड़े रहता था। ज़रा पास आ जाओ। बच्चे को आगे करो। एक और लेता हूँ, आँख बंद हो गई थी।
उन्होंने घर की सारी यादें बना दीं, और ख़ुद उनमें से बाहर रह गए।
सालों बाद एल्बम खोलिए, तो सबसे ज़्यादा याद वही आता है जो फ़्रेम में नहीं — फ़्रेम के पीछे था।
आपके घर की तस्वीरें कौन खींचता था?
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