
सुबह की पहली चीज़
घर में हर किसी की सुबह का एक क्रम होता है, जो कभी लिखा नहीं गया।
कोई उठते ही चश्मा ढूँढ़ता है — वही मेज़, वही कोना, वही जगह। फिर खिड़की खोलना। फिर चाय। फिर वही कुर्सी, वही अख़बार, वही पन्ना पहले।
हमें लगता है ये आदतें हैं। पर सच ये है कि ये उनका अपना छोटा-सा रिवाज़ था, रोज़ दोहराया हुआ, बिना किसी को बताए।
और जिस दिन वो इंसान नहीं रहता, चश्मा उसी मेज़ पर रखा रह जाता है — अपनी जगह पर। तब वो चीज़ नहीं लगती। एक अधूरा क्रम लगता है।
हमें त्योहार याद रहते हैं। पर किसी को सबसे साफ़ यही याद रहता है — उनकी सुबह कैसे शुरू होती थी।
आपके घर में सबसे पहले कौन उठता है, और उठकर सबसे पहले क्या करता है?
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