
आख़िरी रोटी
घर में खाना सबके साथ शुरू होता है, पर ख़त्म अकेले होता है।
कोई एक इंसान हमेशा तवे के पास खड़ा रहता है। सबकी थाली में गरम रोटी जाती है, और उनकी अपनी थाली रसोई में ही रखी रहती है — ठंडी होती हुई। सब उठ जाते हैं, बर्तन समेटे जाते हैं, और तब वो बैठते हैं। अकेले। आख़िरी रोटी अपने लिए।
बचपन में हमने इसे देखा ही नहीं। हमें लगा यही तरीका होता है।
बहुत साल बाद समझ आता है कि वो आदत नहीं थी। वो एक फ़ैसला था — रोज़ दोहराया गया, और कभी किसी को बताया नहीं गया।
आपके घर में सबसे आख़िर में कौन खाता था?
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