सबसे पहले कौन आया था
किसी घर में जब कोई चला जाता है, तो सबसे पहले अक्सर पड़ोसी आते हैं।
रिश्तेदार अभी ट्रेन में होते हैं। फ़ोन अभी लग ही रहे होते हैं। और तब तक कोई सामने वाले घर से चादर ले आता है। कोई चाय का इंतज़ाम कर लेता है। कोई चुपचाप चप्पलें एक तरफ़ सरका देता है और दरवाज़ा खुला रहने देता है।
इन लोगों का नाम किसी काग़ज़ पर नहीं आता। शोक में इनका कोई दर्जा नहीं होता। फिर भी सालों बाद घर के लोग यही याद रखते हैं — कि उस दोपहर, जब कुछ समझ नहीं आ रहा था, कोई बिना पूछे रसोई में खड़ा था।
मदद अक्सर वहाँ से आती है जहाँ से उम्मीद नहीं होती।
आपके परिवार में वो कौन था, जो बिना बुलाए सबसे पहले पहुँचा था?
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