
सुई-धागे वाला डिब्बा
घर में एक छोटा डिब्बा होता था, जिसमें कभी बिस्कुट रहे होंगे। अब उसमें धागे की रीलें हैं, अलग-अलग बटन हैं, और एक सुई जिसे ढूँढ़ते वक़्त सब ज़रा सँभलकर हाथ डालते हैं।
कमीज़ का बटन टूटता था तो कोई कहता था — उतारकर रख दो, लगा दूँगा। अगले दिन वही कमीज़ फिर पहनने लायक मिलती थी। हम कब पहनकर निकल गए, शायद उन्हें पता भी नहीं चलता था।
उस डिब्बे में कई बटन ऐसे भी हैं जिनके कपड़े बरसों पहले जा चुके। फिर भी कोई उन्हें फेंकता नहीं। कभी काम आ जाएँगे।
किसी का ख़याल रखना कई बार इतना छोटा काम होता है कि उसका ज़िक्र ही नहीं होता। बस अगली सुबह एक चीज़ ठीक मिलती है।
आपके घर में सुई-धागे वाला डिब्बा किसके पास रहता था?
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